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Shueb Khan

Shueb Khan
@ShuebKh16859893

Jul 31, 2022
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'अङ्गेन गात्रं नयनेन वक्त्रं न्यायेन राज्यं लवणेन भोज्यं'। इसका अर्थ है कि जिस तरह विभिन्न अंगों से शरीर की, आंखों से चेहरे की और नमक से भोजन की सार्थकता पूरी होती है, वैसे ही न्याय से शासन की सार्थकता पूरी होती है। इसी के साथ का दूसरा श्लोक है- 1

'धर्मेण हीनं खलु जीवितं च न राजते चन्द्रमसा बिना निशा'।। मतलब, धर्म और सदाचरण के बिना मानव जीवन कभी भी उसी प्रकार शोभित और सम्मानित नहीं होता, जिस प्रकार चन्द्रमा की ज्योत्स्ना के बिना अंधियारी रात शोभा नहीं पाती है। टैलिप्राम्प्टर जीवी प्रधानमंत्री का यूं मज़ाक न उड़ाएं। 2
वैसे, मुझे चन्द्रमा कहीं नज़र नहीं आता। रात अंधियारी है- बीते 8 साल से। 3 👉 @Soumitra Roy 🇮🇳 @आचार्य कन्फ़्यूशियस
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कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
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